पानी का महत्व
प्रस्तावना और पानी का महत्व
पानी : जीवन का आहार
प्रस्तावना
पानी जिसे संस्कृत में आप और अंग्रेजी में वाटर कहा जाता है जीवन का मूल्य आहार है पृथ्वी पर जितने भी जीव जंतु वनस्पति या और मनुष्य हैं उन सब की जीवित रहने की सबसे बुनियादी आवश्यकता पानी है या प्रकृति की एक ऐसी अमूल्य दिन है जो न केवल जीवन को बनाए रखने में मदद करती है बल्कि पर्यावरण मौसम कृषि ऊर्जा उत्पादन उद्योग और अनेक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा ती है |
पानी का वैज्ञानिक स्वरूप
अपनी एक रासायनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र h2o होता है इसका मतलब है कि पानी के एक अणु में दो हाइड्रोजन परमाणु और एक ऑक्सीजन परमाणु होते हैं या रंगीन और स्वाधीन होता है लेकिन इसकी उत्पत्ति हर जीवित कोशिका में अनिवार्य है पृथ्वी की सतह का लगभग 71% भाग पानी में ढका हुआ है लेकिन उसमें से केवल 2.5 % ही ताजी पीने योग्य पानी के रूप में उपलब्ध है |
पानी का महत्व
जैविक महत्व
मनुष्य के शरीर का लगभग 60% भाग पानी होता है या शरीर की सभी जैविक प्रक्रिया में भाग लेता है जैसे की पाचन उत्सर्जन तापमान नियंत्रण पोषण तत्वों का संचार और कोशिकाओं की गतिविधियां बिना पानी के जीवन संभव नहीं है|
कृषि में उपयोग |
कृषि क्षेत्र पानी पर अत्यधिक निर्भर है फसल की सिंचाई पशुपालन और भूमि की उपजाऊ क्षमता बनाए रखने में पानी की भूमिका होती है भारत जैसी कृषि प्रधान देश में पानी की उपलब्धता सीधे किसानों की आर्थिक स्थिति और खदान उत्पादन को प्रभावित करती है
औद्योगिक उपयोग |
आने को उद्योगों में पानी का उपयोग कच्चे माल की प्रोसेसिंग मशीनों को ठंडा करने उत्पाद धोने और ऊर्जा उत्पादन में किया जाता है बिना पानी के अनेक उद्योग पर जा सकते हैं
पारिस्थितिक तंत्र में योगदान|
नदिया ,झील , तालाब और समुद्र पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा है यह जल स्रोत अनेक प्रकार के जीवों को आश्रम और आहार प्रदान करते हैं जलचरों का जीवन पूरी तरह जल पर आधारित होता है
पानी का संस्कृत और धार्मिक महत्व|
भारत सहित कई संस्कृतियों में पानी को पवित्र माना गया है गंगा जमुना सरस्वती जैसी नदियों की पूजा की जाती है धार्मिक अनुष्ठानों में जल का प्रयोग अत्यधिक होता है मंदिरों, मस्जिद, गुरुद्वारों और चर्च में जल का पवित्र प्रयोग देखा जाता है |
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आज भी विश्व की एक बड़े जनसंख्या को सांप और सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध नहीं है विकासशील देशों में यह समस्या और अधिक हां है जल संकट जल प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन इस स्थिति को गंभीर बना रहे हैं
पानी के स्रोत
प्राकृतिक स्रोत: वर्षा हिमालय ग्लेशियर नदिया जिले झरने भूमिगत जल |
कृत्रिम स्त्रोत: बांध, नहर ,जलाशय ,तालाब कुएं,हेड पंप |
यह केवल लेख का पहला भाग है जिसमें पानी का परिचय और उसका महत्व समझाया गया है अगर आप चाहो तो मैं अगले भाग में जल संकट जल संरक्षण वर्षा जल संचयन और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी के साथ लेख को आगे बढ़ा सकते हैं क्या आप चाहेंगे कि मैं अगला भाग भी लिखना शुरू करूं



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